सरकार मार्च 2019 तक सार्वजनिक बैंकों में 83,000 करोड़ रुपए और निवेश करेगी। मौजूदा वित्त वर्ष में इन बैंकों में सरकार की तरफ से दी गई पूंजी 1.06 लाख करोड़ रुपए हो जाएगी। संसद से इन बैंकों के लिए 41,000 करोड़ रुपए की मंजूरी मांगी गई है। बजट में इनमें 65,000 करोड़ रुपए निवेश का प्रावधान किया गया था। इस पूंजी से बैंकों को कैपिटल टू रिस्क वेटेड एसेट रेशियो (सीआरएआर) 9% बनाए रखने में मदद मिलेगी।
कुल एसेट की तुलना में एनपीए भी 6% के नीचे आ जाएगा। इसके बाद 4-5 बैंक त्वरित सुधार कार्रवाई यानी पीसीए के दायरे से बाहर आ सकते हैं। रिजर्व बैंक ने 21 सरकारी बैंकों में से 11 को पीसीए में रखा है। पिछले वित्त वर्ष सरकार ने इन बैंकों में 88,000 करोड़ डाले थे। इस साल अब तक वह 22,900 करोड़ दे चुकी है।
जनवरी में घरों के जीएसटी रेट पर विचार हो सकता है
जीएसटी काउंसिल ने आम आदमी के इस्तेमाल की 17 वस्तुओं और 6 सेवाओं पर जीएसटी दरें घटाने का फैसला किया है। इनमें 32 इंच तक के टीवी, सिनेमा टिकट, टायर, वाहनों के कुछ पुर्जे जैसी वस्तुएं शामिल हैं। काउंसिल ने 7 वस्तुओं को 28% स्लैब से बाहर किया है। इसमें अब 28 आइटम बचे हैं। रेट घटने से सरकार का सालाना राजस्व 5,500 करोड़ रुपए कम होगा। जनवरी में काउंसिल की बैठक में फ्लैट और सीमेंट जैसी वस्तुओं के टैक्स रेट पर विचार होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों कहा था कि 28% टैक्स दायरे में सिर्फ 1% वस्तुएं रह जाएंगी।
80,000 करोड़ का विनिवेश लक्ष्य पूरा होने की उम्मीद
सरकार को भरोसा है कि 2018-19 में 80,000 करोड़ रुपए विनिवेश का लक्ष्य हासिल कर लेगी। अभी तक वह 34,000 करोड़ जुटा चुकी है। पीएफसी द्वारा आरईसी में हिस्सेदारी खरीदने का प्रस्ताव है। इससे सरकार को 16,000 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है। भारत 22 ईटीएफ के दूसरे चरण से भी 10,000 करोड़ मिलने का अनुमान है। पवन हंस, सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स, एयर इंडिया की ग्राउंड हैंडलिंग सब्सिडियरी और स्कूटर्स इंडिया को सरकार पूरी तरह बेचने की कोशिश में है।
भारत 22 और सीपीएसई के पिछले फॉलो ऑन ऑफर से सरकार पहले ही क्रमशः 8,300 करोड़ और 17,000 करोड़ जुटा चुकी है। मझगांव डॉक, आरवीएनएल और आईआरएफसी के आईपीओ लाए जा सकते हैं। सरकार इनमें 10% हिस्सेदारी बेचेगी। जीआईसी और न्यू इंडिया एश्योरेंस के शेयर भी ऑफर फॉर सेल के तहत बेचे जाएंगे।
सेटलमेंट के लिए डॉट से बात कर रही हैं आरकॉम और जियो
दूरसंचार विभाग ने रिलायंस कम्युनिकेशंस द्वारा रिलायंस जियो को स्पेक्ट्रम बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी देने से मना कर दिया है। जियो ने कहा है कि डील पूरी होने से पहले स्पेक्ट्रम की जो भी देनदारी होगी वह आरकॉम चुकाएगी। अनिल अंबानी की आरकॉम पर 46,000 करोड़ रुपए का कर्ज है। यह उपकरण बनाने वाली कंपनी एरिक्सन का 500 करोड़ का कर्ज लौटाने में भी डिफॉल्ट कर चुकी है। आरकॉम 122.4 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम जियो को बेचकर कर्ज कम करना चाहती है। इसे दूरसंचार विभाग को 2,947 करोड़ रुपए चुकाने हैं। चर्चा है कि दोनों कंपनियां सेटलमेंट के लिए डॉट से बात कर रही हैं।
एयर इंडिया में 2,345 करोड़ का निवेश करेगी सरकार
सरकार ने एयर इंडिया में 2,345 करोड़ों रुपए इक्विटी निवेश के लिए संसद से मंजूरी मांगी है। यह एयर एसेट होल्डिंग में भी 1,300 करोड़ रुपए निवेश करेगी। एयर इंडिया का 29,000 करोड़ रुपए का कर्जट्रांसफर करने के लिए यह अलग कंपनी (एसपीवी) बनाई गई है। वर्षों से घाटे में चल रही इस एयरलाइन में हिस्सेदारी बेचने की सरकार की कोशिश अब तक नाकाम रही है।
Monday, December 24, 2018
Tuesday, December 11, 2018
अशोक गहलोत और सचिन पायलट ने कैसे ख़त्म किया कांग्रेस का वनवास
कामयाबी उनकी दहलीज पर आती दिख रही है. एक के पास अनुभव और दृष्टि थी, एक पास जोशो जूनून और हसरत को हकीकत में बदलने की ऊर्जा.
राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट की जोड़ी ने कुशलता से काम किया और वनवास काट रही कांग्रेस को राज्याभिषेक की और ले जाते नजर आए.
राजस्थान में दोनों को ही मुख्य मंत्री पद का दावेदार समझा जाता है. मगर सत्ता हासिल करने की ये होड़ कभी ऐसी कटुता में नहीं बदली कि विरोध कांग्रेस के सियासी सफर में अवरोध बन जाए. घर में रखे बर्तन परस्पर खटके भी.
लेकिन इसकी ध्वनि पड़ोस के घरो और गलियों में सुनाई नहीं दी. कोई तीन माह पहले राज्य के करौली में कांग्रेस की संकल्प रैली में दोनों नेता एक मोटर साइकिल पर सवार होकर निकले.
पायलट बाइक चला रहे थे और उनके पीछे बैठ कर हमराह बने. इस पर परिवहन मंत्री यूनुस खान ने मीडिया से कहा, "वे बगैर हेलमेट के गाड़ी चला कर निकले हैं. इससे जनता में ग़लत संदेश जाएगा."
अब मंत्री खान टोंक में पायलट के सामने बीजेपी के प्रत्याशी हैं. बीजेपी ने पूरे राज्य में मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय से सिर्फ खान को ही चुनाव जीतने लायक समझ कर मैदान में उतारा है.
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी इसी तस्वीर से बहुत उत्साहित हुए और एक रैली में कहा, "जिस दिन गहलोत और पायलट एक मोटर साइकिल पर सवार होकर निकले, मैं समझ गया कि कांग्रेस चुनाव जीत गई है."
सत्तारूढ़ बीजेपी ने इन दोनों नेताओ के कथित मतभेदों को सतह पर रख कर ये भाव पैदा करने की कोशिश की कि गुटों में बंटी कांग्रेस जनता की सेवा नहीं कर पाएगी. लेकिन जनता ने इसे तवज्जो नहीं दी.
प्रेक्षक कहते हैं, "घटनाएं और हालात बार-बार सियासत की दीवार पर वो इबारत लिखते रहे जो सत्तारूढ़ बीजेपी को आगाह कर सकती थीं. पर पार्टी नेतृत्व ने उस पर ध्यान नहीं दिया."
बीजेपी साल 2013 में संपन्न विधान सभा चुनावों में प्रचंड बहुमत से जीत कर सत्ता में आई थी. वो मोदी लहर का दौर था और बीजेपी ने दो सौ में से 163 सीटें जीत कर कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ कर दिया था.
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लेकिन इसकी ध्वनि पड़ोस के घरो और गलियों में सुनाई नहीं दी. कोई तीन माह पहले राज्य के करौली में कांग्रेस की संकल्प रैली में दोनों नेता एक मोटर साइकिल पर सवार होकर निकले.
पायलट बाइक चला रहे थे और उनके पीछे बैठ कर हमराह बने. इस पर परिवहन मंत्री यूनुस खान ने मीडिया से कहा, "वे बगैर हेलमेट के गाड़ी चला कर निकले हैं. इससे जनता में ग़लत संदेश जाएगा."
अब मंत्री खान टोंक में पायलट के सामने बीजेपी के प्रत्याशी हैं. बीजेपी ने पूरे राज्य में मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय से सिर्फ खान को ही चुनाव जीतने लायक समझ कर मैदान में उतारा है.
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